Lyrics: Navneet Kaur
Music: Navneet Kaur
सरहदों को हवा ऐसी रास आती है
किसी के जिगर का ख़ून है वो भी
जान सरहद पर हमारे लिए जो काम आती है
मिटी भी रोती है तुम क्या जानो
जब ख़ून से बेटों के भीग जाती है
रोती हैं धरती गगन भी रोता
वीरों के ख़ून से जब यह रंग जाती है
क्या फ़र्क़ है ,,लहू के रंग में
सरहदें हमसे यह पूछना चाहती है
है
बहती रहे दिलों में मोहब्बते
सरहदो को हवा ऐसी रास आती किसी के जिगर का ख़ून है वो
जान सरहद पर हमारे लिए जो काम आती है
बर्फ़ की आँधी सूरज की अदाएँ
यह जलती ज़मीं यह सर्द हवाएँ
मौसम जो सताएँ है उन्हें जलायें
हम घर में अपने चैन से तब सो पाएँ
बचपन चूड़ी मेहंदी भी क़ुर्बान हैं होतें
सरहदें हमसे यह कहना चाहती हैं
बहती रहे दिलों में मोहब्बते
सरहदों को हवा ऐसी रास आती है
इक सीबहारें हैं इक से रंग सारे
दोनो के साँझे यह गगन के तारे
इक ही चंदा इक ही सूरज
दें सबको यह इक से उजियारे
यह तेरा वतन यह मेरा वतन
एक दिल जैसे और दो हैं बदन
सबको मुबारक उनकी आज़ादी
सरहदें हमसे यह कहना चाहती है
बहती रहें दिलों में मोहब्बतें
सरहदों को हवा ऐसी रास आती है
किसी के जिगर का ख़ून है वो भी