Lyrics: Irshad Kamil
Music: A.R. Rahman
Producer: Sameer Nair/Deepak Segal
शहर है, लोग हैं, भीड़ है, काम है
गुनगुनी धूप है, शाम है
मैं भी हूँ, वो नहीं
वो नहीं जो मेरे नाम है
शोर है, फ़िक्र है, मैं भी हूँ, वो नहीं
है यही सच मेरा, है यही सच तेरा
नफ़रतों में मोहब्बत को ना भूलना
हाथ जो है उठा, गर्दनें जो कटीं
वो भी मैं, वो भी तू आदमी
नब्ज़ है, ख़ून है, साँस है, जिस्म है
ज़िंदगी जीने की ये भला कौन सी क़िस्म है?
नाम भी है मेरा, शक्ल भी है मेरी
दोनों में जो था मैं, वो नहीं
तुम्हीं हो जो दूर-दूर दिल करते
तुम्हीं हो जो रोम-रोम दुख भरते
तुम्हीं हो जो शाख़-शाख़ बन कटते
तुम्हीं हो जो प्यार-प्यार नित रटते
तुम्हीं तो भीड़ और दल बन जाते
तुम्हीं तो लालचों से छन जाते
तुम्हीं शहर-शहर फिरते हो
तुम्हीं जो रोज़ आँख से गिरते
तुम्हीं हो जो साफ़-साफ़ सब दिखते
तुम्हीं हो जो झूठ-मूठ सब लिखते
तुम्हीं हो जो रोज़-रोज़ बढ़ जाते
तुम्हीं हो जो जीते-जी ही मर जाते
तुम्हीं हो जो...
किस तरह अब मेरे दर्द का हो बयाँ
लफ़्ज़ तो खो गए चीख़ में
मेरे टुकड़े हुए
मेरे टुकड़े तो तुम मोड़ दो भीख में
मैं अभी हूँ यहीं, वो नहीं
Vocals: Armaan Khan/Sameer Khan