Lyrics: Atul Kumar Rai
Music: Madhukar Anand
समधी के संझिया से रहिया निहारत मनवा गइल पगलाई
मड़वा में देर होता. डलवा चढ़ावे खातिर मन करे दी गरियाई.
धीरे-धीरे हो भसुरा...
1
टीका चढ़ावे नाहीं, नथिया चढ़ावेला
मड़वा में पान खाके, मुंहवा चलावेला
सोने के चैन चढ़ावे ना जल्दी, मुड़ी खाली हिलावे
माड़ो में लयक़ीन पर मारेला लाइन, फोटो खाली खिंचवावे...
धीरे धीरे हो भसुर।
2
हार के बेकार इनकर, लागता डिजाइन
गहना त फेक सारा, लउकsता साइन
ना,साड़ी बनारसी ना मंगटीका नाहीं झुमका चढ़ाबे
मंगला पर नेग खाली नखरा दिखाके जाली नोट दिखाबे
धीरे धीरे हो भसुर….