Lyrics: Kartikay Agarwal
धीमी चाल इस शहर में चलता हूं मैं
दोस्ती का हाथ आगे करता हूं मैं।
कुछ फूंके से कदम, संकुची दस्तकें
तिरछी आंखों से ही रस्ते नपता हूं मैं।
चलता हूँ मैं
मैं बेघर नहीं हूं, हां शायद घर–गुज़ार हूं,
गिरता संभलता–सा जिंदगी टटोलता हूं मैं।
चलता हूँ मैं
मगर ये भी अजब रिवायत कारवां है, कि वो
घर छोड़ देता, जिसे घर समझता हूं मैं।