Lyrics: Azad Singh/Rajat Kumar
Music: Azad Singh/Sameer Sameer/Parshant Khairwal
तो भाई बात कहां से जर जोरू और जमीन की कहानी आजाद खंडा खेडी की जुबानी भाई रे कोई सा भी युग रहा हो कौन सा भी दौर रहा हो इस जर जोरू और जमीन के कारण के के होंदा आन लाग रहा है क्या बताया एक बात के द्वारा
छोटा सा मैं सुनता आया आ गया मेरा यकीन
बड़े-बड़े का नाश करादे जर जोरू जमीन रै
छोटा सा मैं सुनता आया आ गया मेरा यकीन
बड़े-बड़े का नाश करादे जर जोरू जमीन रै
छोटा सा मैं सुनता आया
Rap 1
सतयुग की के बात करूँ जीब राजे,रंक,फ़क़ीर
नहीं।
उरे चोगर्दे को खारा पानी पीन ने मीठा नीर नहीं।
या बात नहीं रै पानी की मै बात करु सू रिश्ता की।
जो धरती खातर कट मरज्या वे लोभी से कोई
वीर नहीं।
जीब नाश के बदल छाजे तो फेर नाश कसुता होना रै।
भाईचारे के फेर आग लगाके बस लालच ही तो बोना रै।
जो बहू बेटी का मान ना जाने उसका भी के होना रै।
ईसा कपूत ने काल ठाले फेर उसती भी के रोना रै।
जिस घर में बाप की कदर नहीं वो घर नहीं बस मकान रै।
कड़वे लागे बोल मात के वो किसा नीच इंसान रै।
जर के कारण होते देखे दुनिया के मैं कतले आम
जर हो जब भी ना हो जब भी सबकी राखे नींद हराम
यार प्यारे रिश्तेदारी सारे के हो जा बदनाम
अहंकार में नाड तूडाले धेला तक ना आवे काम
जर के कारण रोजाना हो वारदात संगीन
बड़े-बढया का नाश करादे जर जोरू जमीन रै
छोटा सा मैं सुनता आया
Rap 2
सरगना, जमींन खातर भाई मन्ने कटदे देखे।
कुनबा पे काल मन्ने हसदे देखे ।
भाई का ही भाई बना लहू का तिसाया।
चंद टुकड़ेयां पे भाई मन्ने मरदे देखे।
के गेल्यान या जाणी जमीन तेरे।
क्यू भाई पे होव ना यकीन तेरे।
क्यू लागन लागे तनें आपने ही खारे।
क्यू बच रया ना थोड़ा भी ज़मीर तेरे।
क़ुनबे ते बाबू में प्राण होवे।
क़ुनबे ते माँ में ही जान होवे।
क़ुनबा बिना किसा घर किसा गाम।
क़ुनबा तो घर की शान होवे।
उरे लड़के लड़के ने होगे क़ुनबे ख़त्म।
या रीत सदा ते चाल रही।
जर जोरू ज़मीन बेरा नी और कितना खून
है मांग रही।
कोई भी ना बच पावे जो आजा इसकी टक्कर में
कदे बिना लिकड़ सके या ईसा फसा दे चक्कर में
मीठी बोली न्यू लागे जनू घी घल गया हो शक्कर में
राजा लोग भिखारी बनगे गम योगी और फक्कड़ में
जोरू कर दे पोबारा के पल में काने तीन
बड़े-बड़े का नाश करादे जर जोरू जमीन रै
छोटा सा मैं सुनता आया
धरती खातर लड़के मर गया सागी भाई चारा रै
इसी के बैरन धरती होगी सब कीमे कर दिया न्यारा रै
एक अपना आके कान फूक गया कोई नहीं से थारा रै
ले लाठी जेली और गंडासे कुनबा खप गया सारा रै
आजाद सिंह यो कोड उदाहरण कांद खिंचगया चीन
बड़े-बड़े का नाश करादे जर जोरू जमीन रै
छोटा सा मैं सुनता आया