Lyrics: Atul Kumar Rai
Music: Madhukar Anand
माटी को सोना करने वाली कलाकारी हैं जी।
हाँ हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी।
बुद्ध का हम ताना-बाना, जैसे प्रिय लागे मखाना
हम हैं महावीर की बानी, आर्यभट्ट जैसे ज्ञानी
ये धरती अशोक वाली, जलती है अबीर बलशाली
उस बंजर को सींचा करते हैं,जिसका न कोई माली
अकेले चाणक्य जैसे सौ-सौ पे भारी हैं जी
हां, हम बिहारी हैं जी...
थोड़े संस्कारी हैं जी...
दिल्ली-बॉम्बे, दुबई,लंडन हमसे गुलजार रहते
सूरीनाम मॉरिसश के खेत भी कहानी कहते।
दुनिया में जहां भी जाते हैं, हम मेहनत से छा जातें हैं
डूबते सूरज को अरघ चढा, छठ की महिमा बतलाते हैं
कुँवर सिंह जेपी जैसे , बागी क्रांतिकारी हैं जी
हां,हम बिहारी हैं, थोड़े संस्कारी हैं जी..
सबसे ज्यादा आईएस-पीसीएस , विद्यापति की रचना हैं हम
रेणु की कहानी दे दी, दिनकर की कविता हैं हम
कभी सांचे में ढल जाते हैं, कभी ख़ुद सांचा बन जाते हैं।
कभी चट्टानों से टकराके ,झरना हम नया बहाते हैं।
गुरुगोविंद सिंह का साहस , नालंदा की क्यारी हैं जी
हाँ हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी।
सोन के कछार हैं हम कोसी गंगाधारी हैं जी
हाँ हम बिहारी