Bansuri Ki Dhun Teri

Lyrics: Anand Singh Music: Ishwar Kumar कान्हा जहाँ है प्रेम वहीं है मोदक कान्हा की मुरली है
बिसराए सुध मेरी बाँसुरी की धुन तेरी कान्हा कहे वो संदेस रे
बिसराए सुध मेरी बाँसुरी की धुन तेरी कान्हा कहे वो संदेस रे ...
लगती है साँची साँची बातियाँ सभी काहे जियरा बदल रहा भेस ये
बिसराए सुध मेरी बाँसुरी की धुन तेरी कान्हा कहे वो संदेस रे ...
अलाप...
हो..., गोपियों सी चाहू आज दिखूँ मैं...के अंग अंग करने लगा ये शृंगार......
(1)
कान्हा तोसे बांचूँ सुन ..... क़िस्से मैं दिल के यूँ इतना उमड़ रहा प्यार है
हो मीठी तेरी प्यारी प्यारी अटखेलियों में मुझे दिखने लगा इक संसार है
चूड़ियाँ मचल रही बिंदिया संभल रही आज बनाऊँ मैं तो केस रे...केस रे
बिसराए सुध मेरी बाँसुरी की धुन तेरी कान्हा कहे वो संदेस रे