Lyrics: Atul Kumar Rai
Music: Madhukar Anand
नाम तुम्हारा होंठ पे आया
चारों दिशा में मंगल छाया
सूनी सी मेरी बगिया को
तूने है फिर से महकाया
क्रॉस- वर्षा हो रही शुभ की मुझ पर
लाभ की वेला आई है
हे गणपति गजानन तूने कृपा ऐसी बरसाई है।
सूखे जेठ से जीवन में फिर हरियाली सी छाई है।
1
कभी बहा न खुली हवा में रुका हुआ मैं पानी था
नैया लगी डोलने
मोदक मूल का मोल न जानी मैं मूरख अज्ञानी थी
गई न कहीं बोलने
आज तरंगे नाँच रही हैं, नई लहर लहराई है
हे गणपति गजानन तूने कृपा ऐसी बरसाई है
सूखे जेठ से जीवन में फिर हरियाली सी छाई है।
2
जीवन में उलझे प्रश्नों की बौछारें जब आई थीं
बन गए उत्तरमाला
राह में चलते-चलते जब अंधेरा घिर आया था
तूने किया था उजाला
तुझको पाकर मैनें फिर से रिद्धि-सिद्धि सब पाई है
हे गणपति गजानन तूने कृपा ऐसी बरसाई है
सूखे जेठ से जीवन में फिर हरियाली सी छाई है।