Lyrics: Amitabh Bhattacharya
Music: Devi Sri Prasad
सच लगता है झूठ जैसा
है ये तेरी आँखों का करम
दृश्यम ..
दृश्यम ..
जो ये देखती हैं सच है वो
या है सच होने का भरम
दृश्यम ..
दृश्यम ..
जितनी भी सुनवाइयाँ
झूठ की हों सौ दुहाइयाँ
देके रहता है
सच की गवाहियाँ
दृश्यम ..
दृश्यम ..
झूठ में तो कई राज़ छुपते हैं
खा के झूठी सी क़सम
दृश्यम ..
दृश्यम ..
राज़ रह के भी रह नहीं पाता
है ये सच का धरम
दृश्यम ..
दृश्यम ..
झूठी लड़ के लड़ाइयाँ
झूठ देता है सफ़ाइयाँ
ला के रहता है
झूठ की तबाहियाँ
दृश्यम ..
दृश्यम ..
एक झूठ को छुपाने में तो
लाखों झूठ पड़ जायें कम
दृश्यम ..
दृश्यम ..
एक सच काफ़ी तोड़ने के लिये
हर झूठ का अहम
दृश्यम ..
दृश्यम ..
झूठ के कारावास* में
दम तोड़ने से पहले
देना चाहता है
सच को रिहाइयाँ
दृश्यम ..
दृश्यम ..