Lyrics: Mahendra Dhirajlal Kamdar
Music: AKSHAY VAIRAGI
सपना बनी है हर ख़ुशी, एक तेरे ख़्वाब में,
अपना नहीं है अब, कोई भी तेरे बाब में,
इतने हैं बद-गुमान वो के पूछते हैं अब,
होता है अब सवाल क्यूँ, हर एक जवाब में,
सपना बनी है हर ख़ुशी, एक तेरे ख़्वाब में,
अपना नहीं है अब कोई भी तेरे बाब में,
उन पे निखार आए क्यूँ ऐसा 'इताब में,
जैसे कि आफ़ताब घुले माहताब में,
हमने तो रख दिया है, कलेजा निकाल के,
दिखते हैं जूठ क्यूँ उसे, फिर हर सवाब में,
शाहिद है रंग, हमारी वफ़ा के, गुलाब में,
चाहो तो ख़ूँ-ए-दिल, मैं मिला दूँ शबाब में,
सपना बनी है हर ख़ुशी, एक तेरे ख़्वाब में,
अपना नहीं है अब, कोई भी तेरे बाब में,
आगे हैं आइने के जो नाज़-ओ-अदा में वो,
है ये सराब रेत में के मय सराब में,
अब तक जो थे नदीम, बने हैं रक़ीब वो,
साक़ी पिलाए ज़हर, मिला कर शराब में,
छुपते कहाँ हैं हुस्न के तेवर हिजाब से,
कितने किये सितम, ज़रा लाए हिसाब में,
सपना बनी है हर ख़ुशी, एक तेरे ख़्वाब में,
अपना नहीं है अब, कोई भी तेरे बाब में,