Lyrics: Azensha
Music: Azensha
दिल में एक दर्द छुपाए,
हम रो रहे दूसरे पर।
आंसू भी बस इतने ही बाकी
कि धुंधली कर दें नज़र।
बस अगर कोई सहला दे हल्के से सर,
कहे कर ना तू कोई अगर-मगर
है ये सफ़र ज़िंदगी का...
तो बस्ता उठा और चल।
जिससे टकराके चलते चले
वो तो पत्थर था,
जिससे फिसले, ज़मीन पर गिरे, वो
तो कंकड़ था। ये चोटें ,
खरोचें बस लाल हैं, ये
दुखते नहीं। मेरे सारे ग़म असली मेरे अंदर
वो दिखते नहीं।
ऐसे में अगर कोई सहला दे हल्के से सर,
कहे कर ना तू कोई अगर-मगर है ये सफ़र ज़िंदगी
का... तो बस्ता उठा और
चल।
सूरज का नहीं मुझे
सहारा जुगनुओं का, जीने के लिए एक जुनून
काफ़ी है। रखना ही भला क्यों हिसाब अब ग़मों
का, मेरे ख़्वाहिशों के तालों पर लगी
ये ज़ंग बरसों पुरानी है।
ख़याल बन के रह गई ख़ुशी मेरी,
मुझे मारकर मरेंगी आदतें मेरी। फ़रमाइशें ख़ुदा से भी ना की
कभी, क़ुबूल हो दुआ ये मेरी
आख़िरी... के कोई अगर ज़रा
सहला दे हल्के से सर, कहे कर ना तू कोई
अगर-मगर है ये सफ़र ज़िंदगी का...
तो बस्ता उठा और चल।