Shiuli

Lyrics: Azensha Music: Azensha इतना क्या कोई सोचता है क्या कभी कि कल क्या होगा आज को भुलाके? देखो चांद आया छत के ऊपर इस उम्मीद से कि काश वो तुम्हें सुला दे। ये शिऊली के फूलों की ख़ुशबू हवा में घुली है तुम्हारे लिए। पलकों के कोनों पे बैठी है निंदिया हज़ार ख़्वाहिशों के बहाने लिए। बस कोई अगर ज़रा सहला दे हल्के से सर, रह बेफ़िकर, तू कर सबर, ले थाम हाथ नूर-ए-ज़िंदगी का... कर शुकर अदा और चल।
सूरज का ना सही तुझे सहारा जुगनुओं का, जीने के लिए एक जुनून काफ़ी है। करना ही भला क्यों अफ़सोस आंसुओं का, होठों पर हंसी की गुंजाइश अभी भी बाकी है। मिलना चाहे तुझसे
हर ख़ुशी तेरी, पूरी होने को हैं ख़्वाहिशें सभी। ख़यालों में भी सोचा होगा ना कभी क़ुबूल होगी वैसे हर दुआ तेरी। ऐसे ही अगर कोई सहला दे हल्के से सर रह बेफ़िकर, तू कर सबर, ले थाम हाथ नूर-ए-ज़िंदगी का... कर शुकर अदा और चल।