Shayad

Lyrics: Azensha Music: Azensha शायद जब ज़िंदगी ज़रूरत से ज़्यादा परेशान कर देती है, तो दुनिया को आप और आप को दुनिया समझ आनी बंद हो जाती है। एक ज़रा सी अनबन हुई दिल की दिमाग से... और तन्हाइयां कुछ ग़ज़ और गहरी हो जाती हैं। बेबसी महज़ हाल नहीं अब वो हकीकत है, अकेले भी रहने की चाहत है और भीड़ में भी। खुल कर हंसना भी है और चीख कर रोना भी... पर इस ठंडी सी रूह को कुछ मेहसूस ही नही होता। आने वाले कल और आज के बीच के फ़र्क का बोझ जाने क्यों बीते कल के कंधों पर होता है... बेशुमार रातें बे नींद गंवा देने के बावजूद भी वो सुबह नही आती जिसके इंतज़ार में आंखें दरिया और दिल बंजर हो बैठा है। ख़ैर, ज़ेहन में उठे सैलाबों को सुकूं शायद ही मिले, जाने कितने तूफ़ान हैं इस कश्ती के हिस्से, क्या पता...
किनारा ना ही मिले... बहुत करीब पहुंच चुकीं हैं मेरी उम्मीदें शिकस्त के, कल शायद मैं मिलूं या ये ख़त मिले...