Lyrics: Surinder Sehaj Music: Surinder Sehaj कमी है कोई तो है मेरे सर झुकाने में , कोई कमी नहीं है सांई के ख़ज़ाने में ।।
के इसके दर पे जो बनके सवाली आता है , वो अपनी झोलियाँ ख़ुशियों से भर के जाता है ।।
है शिर्डी वाले मेरे बाबा की अनोखी अदा , है इसने हर दफा बच्चों की रक्खी लाज सदा ।।
किसी को ना ठुकराया मेरे सांई नाथ ने , दुख सबका मिटाया मेरे सांई नाथ ने ।
गले सब को लगाया मेरे सांई नाथ ने ,, दुख सबका मिटाया मेरे सांई नाथ ने ।।
दुखी गरीब है या कोई बेसहारा है , सभी के वास्ते खुल्ला सांई का द्वारा है , नज़र में सांई की इंसान सब बराबर हैं , सांई के दिल में तो बसता जहान सारा है ,,
तेरी रहमत मेरे बाबा जिसे भी मिल जाये , ख़ुशी ख़ुद आके उसकी ज़िंदगी में खिल जाये ,, कि जिसकी तुम लिखो तक़दीर अपने हाथों से , फिर उसके ठाठ देखकर जहां भी हिल जाये ,,
सबपे करम कमाया मेरे सांई नाथ ने , दुख सबका मिटाया मेरे सांई नाथ ने ।।
तेरे हाथों में सांई वो रहम की शक्ति है , कि पापी से पापी को भी मिल जाती मुक्ति है , मेरे दिल ने ही नहीं , सबके दिल ने माना है , तेरी भक्ति तो बाबा सीधे रब की भक्ति है ,,
मेरे सांई ने कहा सबका एक है मालिक , है ज़र्रा ज़र्रा उसका सारी ख़लकत का ख़ालिक , सहज उसको हर इक लम्हे में शामिल यूँ कर लो , इबादत शाम-ओ-सहर दोपहर प्रातः कालिक
सही राह पे चलाया मेरे सांई नाथ ने , दुख सबका मिटाया मेरे सांई नाथ ने ।।