ROOH KA THIKANA

Lyrics: VARUN DEY Music: VARUN DEY वीरान है ये दुनिया, झूठा है हर फ़साना, अब तो मदीरा ही है, रूह का ठिकाना। सुन्न हो चुकी साँसों में, तन्हाई का अंधेरा, प्याले में ही डूब गया, मेरे वजूद का सवेरा।
इश्क़ एक छलावा था, भावनाओं का व्यापार था, मिट्टी के इन पुतलों का, वो झूठा अहंकार था। टूट गए वो भ्रम सारे, बिखर गया वजूद, मय की इन बूँदों में ही, ढूँढता हूँ मकसूद।
वीरान है ये दुनिया, झूठा है हर फ़साना, अब तो मदीरा ही है, रूह का ठिकाना।
भीड़ में भी रूह मेरी, चीखती है अकेली, सुलझ ना पाई कभी, ज़िन्दगी की ये पहेली। होशो-हवास की दुनिया में, बस ग़म ही मुकद्दर है, इस शराब की गहराई में, एक शांत समंदर है।
सुन्न हो चुकी साँसों में, तन्हाई का अंधेरा, प्याले में ही डूब गया, मेरे वजूद का सवेरा।
जाम की हर घूँट में, मोक्ष का एहसास है, बुझती नहीं ये रूह की, कैसी अजीब प्यास है। होश की इस दुनिया को, मैंने कर दिया विदा, मयख़ाने की इस मिट्टी पर, होने दे मुझे फ़िदा।
सुन्न हो चुकी साँसों में, तन्हाई का अंधेरा, प्याले में ही डूब गया, मेरे वजूद का सवेरा।
वीरान है ये दुनिया, झूठा है हर फ़साना, अब तो मदीरा ही है, रूह का ठिकाना। सुन्न हो चुकी साँसों में, तन्हाई का अंधेरा, प्याले में ही डूब गया, मेरे वजूद का सवेरा।